############ ॐ ###############
आगम निगम प्रसिद्ध पुराना | सेवाधरमु कठिन जगु जाना ||
स्वामी धरम स्वारथही बिरोधु | बैरु अंध प्रेमही न प्रबोधु ||४||
भावार्थ- वेद, शास्त्र और पुराणों में प्रसिद्ध है और जगत जानता है की सेवा धर्म बड़ा कठिन है | स्वामी धर्म (स्वामी के प्रति कर्त्तव्य पालन में) और स्वार्थ में विरोध है (दोनों एक साथ नहीं निभ सकते) वैर अँधा होता है और प्रेम को ज्ञान नहीं रहता [ मैं स्वार्थवश कहूँगा या प्रेमवश, दोनों में ही भूल होने का भय है ]
Meaning - It is fully recognized in the Tantras, Vedas and Puranas and all the world knows that the duty of a servant is hard indeed. Duty to a master is incompatible with selfishness. hatred is blind and love is not discreet. HR people recognize this problem as agency problem or principle agent conflict.
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