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शनिवार, 19 दिसंबर 2020

स्वामी विवेकानन्द

############ ॐ ############### 

बडे-बडे दिग्गज बह जायेंगे। छोटे-मोटे की तो बात ही क्या है! तुम लोग कमर कसकर कार्य में जुट जाओ, हुंकार मात्र से हम दुनिया को पलट देंगे। अभी तो केवल मात्र प्रारम्भ ही है। किसी के साथ विवाद न कर हिल-मिलकर अग्रसर हो -- यह दुनिया भयानक है, किसी पर विश्वास नहीं है। डरने का कोई कारण नहीं है,  भय किस बात का? किसका भय? वज्र जैसा हृदय बनाकर कार्य में जुट जाओ।

############ ॐ ###############

सोमवार, 29 अक्टूबर 2018

स्वामी विवेकानन्द # 12

############ ॐ ###############
 
सफलता के लिए ये ३ बातें अनिवार्य है - पवित्रता , धैर्य  व अध्यवसाय ।
अपने आप में श्रद्धा रखो । अतीत की पूजा करने की बजाय वर्तमान को पूजो । स्थिर भाव से श्रद्धा के साथ कार्य किये जाओ , सर्वोपरि पवित्र और धून के पक्के बनो , अपना भविष्य उज्जवल है यह विश्वास रखो । यह न सोचो की तुम दरिद्र हो , अपने आदर्श के प्रति निष्ठा रखो ।

############ ॐ ###############

शुक्रवार, 4 अगस्त 2017

स्वामी विवेकानन्द # 11

############ ॐ ###############

मन का विकास करो और उसका संयम करो, उसके बाद जहाँ इच्छा हो, वहाँ इसका प्रयोग करो–उससे अति शीघ्र फल प्राप्ति होगी। यह है यथार्थ आत्मोन्नति का उपाय। एकाग्रता सीखो, और जिस ओर इच्छा हो, उसका प्रयोग करो। ऐसा करने पर तुम्हें कुछ खोना नहीं पड़ेगा। जो समस्त को प्राप्त करता है, वह अंश को भी प्राप्त कर सकता है। 

############ ॐ ###############

सोमवार, 7 सितंबर 2015

स्वामी विवेकानन्द # 10

############ ॐ ###############

सभी मरेंगे- साधु या असाधु, धनी या दरिद्र- सभी मरेंगे। चिर काल तक किसी का शरीर नहीं रहेगा। अतएव उठो, जागो और संपूर्ण रूप से निष्कपट हो जाओ। भारत में घोर कपट समा गया है। चाहिए चरित्र, चाहिए इस तरह की दृढ़ता और चरित्र का बल, जिससे मनुष्य आजीवन दृढ़व्रत बन सके।

############ ॐ ###############

सोमवार, 8 जून 2015

स्वामी विवेकानन्द # 9

 ############ ॐ ###############

लोग तुम्हारी स्तुति करें या निन्दा, लक्ष्मी तुम्हारे ऊपर कृपालु हो या न हो, तुम्हारा देहान्त आज हो या एक युग मे, तुम न्यायपथ से कभी भ्रष्ट न हो।

############ ॐ ###############

सोमवार, 20 अक्टूबर 2014

स्वामी विवेकानन्द # 8

############ ॐ ###############

उठो, जागो और तब तक रुको नही जब तक मंजिल प्राप्त न हो जाये । 

############ ॐ ############### 

सोमवार, 28 फ़रवरी 2011

स्वामी विवेकानन्द # 7

############ ॐ ###############

मानव-देह ही सर्वश्रेष्ठ देह है, एवं मनुष्य ही सर्वोच्च प्राणी है, क्योंकि इस मानव-देह तथा इस जन्म में ही हम इस सापेक्षिक जगत् से संपूर्णतया बाहर हो सकते हैं–निश्चय ही मुक्ति की अवस्था प्राप्त कर सकते हैं, और यह मुक्ति ही हमारा चरम लक्ष्य है।

############ ॐ ###############

सोमवार, 2 अगस्त 2010

स्वामी विवेकानन्द # 6

############ ॐ ###############

मुक्ति-लाभ के अतिरिक्त और कौन सी उच्चावस्था का लाभ किया जा सकता है? देवदूत कभी कोई बुरे कार्य नहीं करते, इसलिए उन्हें कभी दंड भी प्राप्त नहीं होता, अतएव वे मुक्त भी नहीं हो सकते। सांसारिक धक्का ही हमें जगा देता है, वही इस जगत्स्वप्न को भंग करने में सहायता पहुँचाता है। इस प्रकार के लगातार आघात ही इस संसार से छुटकारा पाने की अर्थात् मुक्ति-लाभ करने की हमारी आकांक्षा को जाग्रत करते हैं।

############ ॐ ###############

मंगलवार, 15 जून 2010

स्वामी विवेकानन्द # 5

############ ॐ ###############

संन्यास का अर्थ है, मृत्यु के प्रति प्रेम। सांसारिक लोग जीवन से प्रेम करते हैं, परन्तु संन्यासी के लिए प्रेम करने को मृत्यु है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम आत्महत्या कर लें। आत्महत्या करने वालों को तो कभी मृत्यु प्यारी नहीं होती है। संन्यासी का धर्म है समस्त संसार के हित के लिए निरंतर आत्मत्याग करते हुए धीरे-धीरे मृत्यु को प्राप्त हो जाना।

############ ॐ ###############

शुक्रवार, 14 मई 2010

स्वामी विवेकानन्द # 4

############ ॐ ###############

किसी बात से तुम उत्साहहीन न होओ; जब तक ईश्वर की कृपा हमारे ऊपर है, कौन इस पृथ्वी पर हमारी उपेक्षा कर सकता है? यदि तुम अपनी अन्तिम साँस भी ले रहे हो तो भी न डरना। सिंह की शूरता और पुष्प की कोमलता के साथ काम करते रहो।

############ ॐ ###############

बुधवार, 3 फ़रवरी 2010

स्वामी विवेकानन्द # 3

############ ॐ ###############
ईश्वर ही ईश्वर की उपलब्थि कर सकता है। सभी जीवंत ईश्वर हैं–इस भाव से सब को देखो। मनुष्य का अध्ययन करो, मनुष्य ही जीवन्त काव्य है। जगत में जितने ईसा या बुद्ध हुए हैं, सभी हमारी ज्योति से ज्योतिष्मान हैं। इस ज्योति को छोड़ देने पर ये सब हमारे लिए और अधिक जीवित नहीं रह सकेंगे, मर जाएंगे। तुम अपनी आत्मा के ऊपर स्थिर रहो।
############ ॐ ###############

मंगलवार, 19 जनवरी 2010

स्वामी विवेकानन्द # 2

जो सत्य है, उसे साहसपूर्वक निर्भीक होकर लोगों से कहो–उससे किसी को कष्ट होता है या नहीं, इस ओर ध्यान मत दो। दुर्बलता को कभी प्रश्रय मत दो। सत्य की ज्योति ‘बुद्धिमान’ मनुष्यों के लिए यदि अत्यधिक मात्रा में प्रखर प्रतीत होती है, और उन्हें बहा ले जाती है, तो ले जाने दो–वे जितना शीघ्र बह जाएँ उतना अच्छा ही है।

बुधवार, 30 दिसंबर 2009

स्वामी विवेकानन्द # 1

"External nature is only internal nature writ large."

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"We want to know in order to make ourselves free. That is our life: one universal cry for freedom. "