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मंगलवार, 18 फ़रवरी 2020

आचार्य रजनीश 'ओशो' # 3

############ ॐ ############### 

तुम शरीर को ही 'मैं' मान लेते हो और तब तुम पीड़ा पाते हो।  अहंकार वह सब कुछ है जो तुम नहीं हो और तुम सोचते हो की तुम हो। अहंकार सदा दुःख में ले जाता है। जब तुम स्वभाव की सुनते हो , यह बात तुम्हे स्वास्थ्य की ओर ले जाती है।  संतोष की ओर , मौन की ओर , आनंद की ओर |


############ ॐ ###############

गुरुवार, 22 फ़रवरी 2018

आचार्य रजनीश 'ओशो' # 2

############ ॐ ###############

जड़ता मृत्यु है , लचीलापन जीवन है।  अहंकार सदा दूरी पर रहने की कोशिश करता है , और दूरी तुम्हे संवेदन शून्य बना देती है। तुम जीवन के ज्यादा निकट नहीं जा सकते, तुम दिखावा कर रहे होते हो की तुम जीवन से ज्यादा ऊँचे हो , जीवन से ज्यादा महान व बड़े हो।

 ############ ॐ ###############

बुधवार, 8 फ़रवरी 2017

आचार्य रजनीश 'ओशो' # 1

############ ॐ ###############

 शुद्धता का अर्थ होता है - तुम्हारी स्वभाविकता , जैसे कि तुम हो - दुसरो के द्वारा प्रभावित नहीं , प्रदूषित नहीं।  किसी को आदर्श मत बनाओ।  कोई किसी दूसरे जैसा नहीं हो सकता। प्रत्येक का अपना अनूठा ढंग होता है , और वही है शुद्धता।  तुम्हारे अपने अस्तित्व का अनुसरण करना , तुम्हारा स्वयं जैसा हो जाना शुद्धता है ।
प्रेम करो बुद्ध /जीजस या कोई और महानात्मा से , उनके अनुभवो द्वारा समृद्ध बनो , पर प्रभावित मत हो जाना।  प्रेम करो , सुनो , आत्मसात करो , पर अनुकरण मत करो।  ग्रहण करो जो कुछ तुम ग्रहण कर सकते हो , लेकिन सदा ग्रहण करना तुम्हारे स्वभाव के अनुसार।
तुम्हे तुम्हारे अपने मार्ग से ही चलना होगा।  जो कुछ तुम ले सकते हो ,  ले लेना , लेकिन बढ़ना अपने मार्ग पर ही।


 ############ ॐ ###############