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कुटशासनकर्तृश्च प्रकृतीनां च दूषकान्।
स्त्रीबालब्राहम्णघ्राश्च हन्यात् द्विट्सेविनस्तथा।
भावार्थ -
राज्य के प्रतीक चिन्हों की नकल से अपना स्वार्थ निकालने वालों, प्रजा को
भ्रष्ट करने में रत, स्त्रियों, बालकों व विद्वानों की हत्या करने वाले और
राज्य के शत्रु से संबंध रखने वालों को अतिशीघ्र मार डालना चाहिये।
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